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  • Published on 15 Jul 2016 by Avdhesh Solanki

जबलपुर.स्मार्ट सिटी योजना में स्मार्ट सॉल्यूशन के तहत पानी को बचाने की एक अनोखी योजना तैयार की गई है। इसके तहत काॅलोनियों में छोटे-छोटे सीवरेज वॉटर फिल्टर प्लांट लगाए जाएंगे। इन प्लांटों में पानी को साफ किया जाएगा और दोहरी पाइप लाइन व्यवस्था से पानी को फिर से लोगों के घरों या व्यावसायिक संस्थानों को दे दिया जाएगा।

घरों में इस पानी से गार्डनिंग की जा सकती है, वाहनों को धोया जा सकता है और कई अन्य कार्यों में इसका उपयोग किया जाएगा। हालांकि वह पानी पूरी तरह साफ होगा जिसका कई अन्य तरीकों से उपयोग हो सकता है। आज की सबसे बड़ी जरूरत पानी है और अब पानी बचाने के लिए ही दुनिया में काम हो रहा है।
नगर निगम जिस योजना पर काम कर रहा है उसमें 40 फीसदी तक पानी की बचत हो सकती है। निगम के कुछ अधिकारी अभी इसी कार्य के सर्वे में लगे हैं। कुछ काॅलोनियों का चयन किया गया है और वहां फिल्टर प्लांट बनाने की तैयारी भी जल्द ही शुरू हो जाएगी। इसके तहत सभी घरों की सीवर लाइन को एक पाइप लाइन से कनेक्ट कर दिया जाएगा और उसका प

टाॅयलेट के पानी को साफ करने बनेंगे ट्रीटमेंट प्लांट, वाहनों की धुलाई में होगा यूज


नी फिल्टर प्लांट में एकत्र कर उसे साफ किया जाएगा।
साफ होने के बाद पानी को वापस घरों में तो दिया ही जा सकता है, साथ ही टैंकरों के माध्यम से पार्कों, डिवाइडरों, की हरियाली की सिंचाई, बिल्डिंग वर्क, गैराजों में वाहनों को धोने आदि के लिए सप्लाई किया जाएगा। इससे निगम को मुख्य जल की सप्लाई कम करने में आसानी होगी।
कठौंदा-तेवर से लाना महंगा

नगर निगम के बड़े फिल्टर प्लांट कठौंदा और तेवर में लगेंगे, पर वहां से यदि पानी को शहर तक लाया जाएगा तो इसके लिए डीजल की बहुत खपत होगी, जिससे यह महंगा सौदा होगा इसलिए हर काॅलोनी या क्षेत्र में छोटे फिल्टर प्लांट लगा दिए जाएंगे, जिससे जरूरत का पानी वहां मिल जाएगा। पार्कों में भी यही पानी सप्लाई किया जाएगा। जिस प्रकार टैंकरों को भरने के लिए नगर निगम ने जगह-जगह हाईडेंट लगाए हैं वैसे ही फिल्टर प्लांट में भी हाईडेंट होंगे। अंतर बस यही कि अभी जो हाईडेंट हैं वे जमीन के अंदर से बोरिंग द्वारा पानी खींचते हैं, जबकि फिल्टर प्लांट में साफ किया हुआ पानी मिल जाएगा।

भूमिगत पानी दूषित नहीं होगा

घरों के टाॅयलेट से निकला पानी कई स्थानों पर कच्ची नालियों के कारण जमीन के अंदर चला जाता है, जिससे भूमिगत जल भी दूषित हो जाता है, जबकि फिल्टर प्लांट बनने से गंदा पानी जमीन के नीचे नहीं जाकर सीधे साफ हो जाएगा।

खेती में भी कर सकते हैं उपयोग

फिल्टर किए गए पानी का उपयाेग खेती में भी किया जा सकता है। ओमती नाला हो या कोई भी अन्य नाला उसके किनारे जितने भी खेत हैं सभी में नालों के पानी का ही उपयोग किया जा रहा है, जबकि यह खतरनाक है, निगम तो पानी को पहले साफ करेगा फिर उसकी सप्लाई की जाएगी, इससे किसी प्रकार का नुकसान भी नहीं होगा।

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